लोकेश मालवीय/पिपरिया। फोटो में दिखाई दे रहीं ये साधारण सी महिला कुमारी हेमा पवार हैं, पिपरिया के पचमढ़ी रोड पर रहने वाली हेमा यूँ तो अपनी छोटी सी सिलाई की दुकान से अपना जीवन निर्वहन कर रही हैं लेकिन इनके जीवन के पीछे 17 साल के जटिल संघर्ष की कहानी है, जो आज भी जारी है । हेमा अकेली हैं, लेकिन इस अकेलेपन को उन्होंने अपनी कमज़ोरी नही बल्कि ताकत बना लिया। यही कारण है कि उन्होंने अपने हुनर को बाँटकर युवा भविष्य को सँवारने का संकल्प लिया।

हेमा पिछले 10 सालों से शासकीय व ग़ैरशासकीय स्तर पर लगने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम में बच्चों व युवाओं को सिलाई, कढाई,थर्माकोल डिज़ाइन, रंगोली ओर लिफाफे बनाने का प्रशिक्षण देती आ रहीं और ये काम उनका अनवरत जारी है। इतना ही नही दूसरों की मदद ओर करियर मैनेजमेंट को लेकर अपना जीवन समर्पित कर चुकी कुमारी हेमा अपना देहदान करने का भी संकल्प ले चुकी हैं, उनका कहना है कि वो मरने के बाद भी ज़िंदा रहना चाहती है, उनके शरीर का अंग किसी के असहाय के काम आजाये ये गर्व की बात होगी। समाज में नारी शसक्तीकरण का संदेश दे रहीं हेमा कहती हैं, महिलाओं को आत्मनिर्भर रहना बहुत ज़रूरी। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर NBTV मध्यप्रदेश की ओरसे नारी शक्ति को प्रणाम।