इंदौर। शिवराज सिंह चौहान कि मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। अब फिर से चौहान घिरते हुए नजर आ रहे है। किसान आंदोलन के दौरान मंदसौर में हुई पुलिस फायरिंग में मारे गए किसानों के परिजनों को सीएम ने 1 करोड़ रुपए मुआवजा और सरकारी नौकरियों का ऐलान किया गया था। अब हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करके पूछा है कि यह मुआवजा किस नियम के तहत दिया जा रहा है। बिना किसी जांच के मुआवजे का ऐलान क्यों किया गया। जो पुलिस वाले घायल हुए और जिन संपत्तियों का नुक्सान हुआ उनकी भरपाई कौन करेगा। इसी के साथ सीएम शिवराज सिंह चौहान के सामने नया संकट आ गया है। शिवराज सिंह पिछले दिनों मंदसौर में जाकर मृत किसानों के परिजनों से व्यक्तिगत तौर पर कहकर आए हैं कि मुआवजे का पैसा आपके खाते में आ जाएगा। अब मामला हाईकोर्ट में उलझ गया है।

याचिका एडवोकेट आयुष पांडे ने दायर की है। इसमें कहा है कि यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार ने मुआवजे की घोषणा किस आधार पर की है। प्रदेश के इतिहास में अब तक किसी को इतनी बड़ी रकम मुआवजे के रूप में नहीं दी गई। मामले को लेकर एक उच्चस्तरीय कमेटी भी बनाई गई है, लेकिन उसकी जांच रिपोर्ट आने के पहले ही सरकार ने मुआवजे की घोषणा कर दी। यह जांच करने की कोशिश भी नहीं की गई कि जिन मृतकों के परिजन को मुआवजा देने की घोषणा की गई, उनका आंदोलन में रोल क्या था और मरने वाले घटनास्थल पर क्या कर रहे थे।

निजी संपत्ति के नुकसान की भरपाई भी हो
याचिका में यह सवाल भी उठाया गया कि आंदोलन के दौरान सरकारी के साथ निजी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा। वहीं कानून व्यवस्था बनाए रखने में कई पुलिसकर्मी घायल हुए। सरकार मृतकों के परिजन को मुआवजा दे रही है तो निजी संपत्ति के नुकसान की भरपाई और घायल पुलिसकर्मियों को भी राहत दी जाना चाहिए। कोर्ट ने याचिका की सुनवाई के बाद प्रमुख सचिव और डीजीपी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया।

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