आम व्यक्ति के अब तक हिरासत में फोटो छप गए होते

इंदौर/राजेन्द्र के.गुप्ता। सहायक आबकारी आयुक्त कार्यालय में 41 करोड़ 73 लाख 73 हजार 670 के बैंक चालान फर्जीवाड़े से सरकार के साथ किए गए धोखे में लगभग एक महीने पहले डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्रा ने दो आईपीएस सहित 5 पुलिस अफसरो की एसआईटी गठित की है हालाँकि इसमें से एक आईपीएस का ट्रांसफर हो चुका है। एसआईटी को फरार शराब ठेकेदारों और आबकारी अफसरों ने मजाक बना दिया है क्योंकि ना फरार शराब ठेकेदार जो वर्तमान में भी अपनी शराब दुकाने धड़ल्ले से संचालित कर कमाई कर रहे है वो एसआईटी की पकड़ में आ रहे है ना आबकारी अफसर एसआईटी के सूचना पत्र अनुसार समय पर बयान देने आ रहे है। इसलिए एसा प्रमाणित लगता है कि एसआईटी के अफसर भ्रष्ट आबकारी अफसरों और फरार शराब ठेकेदारों के आगे लाचार और मजबूर नजर आ रहे या सांठ-गांठ की कुछ और कहानी है ? ऐसी स्थिति में यह भी कहा जा सकता है कि क्या सरकार को धोखा देने वाले इतने मजबूत है की उनके आगे सब मजबूर है ?

11 अगस्त को रावजी बाजार थाना इंदौर में अपराध क्रं. 172/17 दर्ज किया गया था पर आज तक पुलिस के हाथ खाली है। इससे एसा लग रहा है बड़े अपराध में अपराध सिर्फ़ जनता को दिखाने और मीडिया में खबर छपवाने के लिए दर्ज करवाया जाता है, वर्ना आम व्यक्ति के अब तक हिरासत में फोटो छप गए होते। एसआईटी के अफसरों ने निलंबित एसी संजीव दुबे सहित आबकारी विभाग के बड़े अफसर जिनकी गंभीर लापरवाही के कारण पूरा फर्जीवाड़ा 16 महीने तक लगातार चलता रहा उनको बयान के लिए सूचना पत्र भेज कर बुलाया किन्तु वो नही आए। आबकारी अफसरों ने हर बार कोई नया बहाना बनाया और एसआईटी अफसर उन बहानो के आगे लाचार नजर आ रहे है, एसे में उस बात की कल्पना करना जरूरी हो जाता है कि अगर इन रसूखदार आबकारी अफसरों की जगह कोई आम व्यक्ति होता तो एसआईटी के पुलिस अफसरों का क्या रवैया होता? खैर यहा भी यह बताना जरूरी है कि आबकारी विभाग के उन छोटे कर्मचारियों ने अपने बयान दे दिए है जिन्हें एसआईटी ने बुलाया पर उन आबकारी अफसरों और शराब ठेकेदारों पर एसआईटी अफसरों का बस नही चल पा रहा है जो इस पूरे फर्जीवाड़े के असल जिम्मेदार है। इस मामले में विभाग के साथ सरकार की भी बहुत बदनामी हो रही है। आम व्यक्ति को उसके बच्चे के जन्मदिन जैसे किसी अवसर के नाम पर पुलिस छूट नही देती है पर आबकारी अफसरों को एसे अवसरों के मामले में एक से अधिक बार छूट दे दी गई। खैर दिनांक 18 सितंबर को एसी संजीव दुबे एसआईटी के समक्ष बयान के लिए उपस्थित हुए और अपने बयान दर्ज करवाए जिसने अपने आपको पूरे फर्जीवाड़े के लिए जिम्मेदार नही बताया। वही कल तीन शराब ठेकेदारों के अग्रिम जमानत आवेदन हाईकोर्ट ने खारिज कर दिए। अब तक खाली हाथ बैठी एसआईटी के नए आईपीएस अफसरो के रिकार्ड पर भी विपरीत असर पड़ सकता है क्योंकि इस मामले में अन्य एजेंसिया करवाई की तैयारी में है।

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