सिवनी मालवा। भले ही एसबीआई देश की सबसे बड़ी बैंक होने का दम भरती हो परन्तु इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है। यदि धरातल पर देखा जाए तो एसबीआई आम इंसानों के लिए नहीं बल्कि व्यापारियों और बड़े लोगों की बैंक है जो की सिर्फ उन लोगो के ही काम आसानी से करती है।

आम आदमी परेशान रहिशो के होते है अन्दर काम
यदि आप आम इंसान है और एसबीआई किसी काम से जा रहे है तो अपने साथ खाने पीने की सामग्री अवश्य लेकर जाए। चूंकि वहाँ जाने के बाद आम आदमी लाइन में खड़े-खड़े अधिकारियो को चाय नाश्ता करते लम्बे समय तक देख सकता है। यही नहीं लाइन का मतलब सिर्फ आम लोगो से होता है बड़े व्यापारी, दलाल, एवं रहिशो का काम लाइन से नहीं बल्कि अन्दर से किया जाता है। वही यदि कोई इसका विरोध करता है तो कर्मचारी ही लड़ाई पर उतारू हो जाते है और काम नहीं करने की धमकी तक दे डालते है।

वर्षो से जमे अधिकारी कर्मचारी हो रहे तानाशाह
एसबीआई में वर्षो से जमे कर्मचारी अपने तानाशाह रवैये से बाज नहीं आ रहे है। आये दिन कस्टमरो से बदसलूकी करना तो मानो आम बात हो गई है। ग्राहक भी सिर्फ इसलिए विरोध नहीं करता है की शिकायत करने के बाद भी तो काम करवाने यही आना पड़ता है। अधिकारियो-कर्मचारियों की डांट सुनने के बाद ग्राहक को ऐसा महसूस होता है जैसे वो खुद के पैसे नहीं बल्कि इन तानशाह अधिकारी कर्मचारी के पैसे निकाल कर ला रहा हो।

इनका कहना है
इस बारे में जब शाखा प्रबंधक से चर्चा की गई तो उनका कहना है की हमारा कोई भी कर्मचारी फ्री नहीं बैठता है। अब लंच करने को तो मना नहीं कर सकते यदि किसी भी कर्मचारी के द्वारा कोई अभद्रता की जाती है तो ग्राहक मुझसे शिकायत कर सकता है।