नई दिल्ली। गुरुवार से शुरू होने वाले बजट सत्र के दूसरे चरण में आधार कार्ड पर सरकार की नीतियों का मुद्दा गर्मा सकता है। एक ओर लेफ्ट, पार्टियां और तृणमूल कांग्रेस सरकार के इस फैसले का विरोध कर रही हैं। वहीं कांग्रेस एलपीजी कनेक्शन और मिड डे मील के लिए अब आधार कार्ड जरूरी होने और बैकों के माध्यम से खाताधारकों पर लगाए जाने वाले पांच करों का विरोध कर रही है। विपक्ष अब इसे मुद्दा बनाने की तैयारी में है। दरअसल अब गरीबों को मुफ्त सिलिंडर तभी मिलेगा जब उनके पास आधार कार्ड होगा। वहीं प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत फ्री एलपीजी कनेक्शन के लिए अब आधार कार्ड जरूरी है। इसके पहले मिड डे मील को भी आधार से जोड़ा गया है।
इसी सिलसिले में तृणमूल संसदीय दल के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि उनकी पार्टी गुरुवार को फिर शुरू हो रहे बजट सत्र में दूसरे विपक्षी दलों के साथ यह मामला जोर-शोर से उठाएगी। डेरेक ओ-ब्रायन ने कहा, ‘पहले मिड-डे मील स्कीम, आईसीडीसी…अब खबर है कि उज्जवला योजना को भी आधार से जोड़ा जा रहा है…हम इससे विशेष तौर पर चिंतित हैं और संसद में दूसरे विपक्षी दलों से साझा रणनीति बनाकर संसद में उठाएंगे। डेरेक ने दावा किया कि देश में करीब 30 करोड़ लोगों के पास आधार नहीं हैं और इसमें 90% बच्चे हैं। इस मसले पर लेफ्ट भी नाराज है…और इसे संसद में उठाने की तैयारी कर रहा है।वहीं सीपीएम सांसद तपन सेन ने कहा, ‘बंगाल में मिड-डे मील स्कीम या कोई दूसरी योजना आधार से जोड़ी जाती है तो उससे बड़ी संख्या में गरीबों को इसका फायदा नहीं मिल पाएगा। बजट सत्र का दूसरा दौर शुरू होने से ठीक पहले सरकारी योजनाओं में आधार को अनिवार्य करने का फैसला सरकार की मुश्किलें बढ़ा सकता है। एक तरफ सरकार महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं को आधार से जोड़ने की कवायद में जुटी है वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसके खिलाफ लामबंद होता दिख रहा है।

अब देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में विपक्ष के इस विरोध से कैसे निपटती है।वहीं कांग्रेस के प्रबंधकों के मुताबिक पार्टी जनहित से जुड़े मसले उठाएगी और संसद में शांति या अशांति इस पर निर्भर करेगी कि उन मसलों पर सरकार की क्या प्रतिक्रिया रहती है। सरकार को जनता विरोधी नीतियों का जवाब देने होगा और कांग्रेस एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाएगी। दरअसल बजट सत्र का दूसरा हिस्सा 9 मार्च से 13 अप्रैल के बीच चलेगा। इसमें सरकार तमाम महत्त्वपूर्ण विधायी मसले निपटाने के प्रयास करेगी, जिसमें जीएसटी को समर्थन करने वाले वित्त विधेयक शामिल हैं, जिन्हें जीएसटी परिषद ने हाल ही में मंजूरी दी है। इसके अलावा लेखानुदान आएगा।

कांग्रेस के प्रबंधकों के मुताबिक पार्टी जनहित से जुड़े मसले उठाएगी और संसद में शांति या अशांति इस पर निर्भर करेगी कि उन मसलों पर सरकार की क्या प्रतिक्रिया रहती है। राज्यसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक सत्यव्रत चतुर्वेदी के अनुसार अगर सरकार हमारी ओर से उठाए गए मसलों पर चर्चा के लिए सहमत होती है तो हम तथ्यों पर बात करेंगे, लेकिन अगर वे विपक्ष की आवाज दबाने की कवायद करेंगे तो व्यवधान होगा। उम्मीद की जा रही है कि संसद की कार्रवाई शुरू होने के पहले विपक्षी नेता 9 मार्च की सुबह बैठक करेंगे और आगामी सत्र के लिए रणनीति बनाएंगे। तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय के अनुसार उनके दल के सांसद 9 मार्च को बैठक कर अलग से रणनीति तैयार करेंगे।

माकपा के लोकसभा सदस्य मोहम्मद सलीम ने कहा कि उनका दल नोटबंदी के असर, नौकरियां जाने, कृषि क्षेत्र के संकट, केरल व असम में सांप्रदायिक टकराव जैसे मसले उठाएगा।