स्टॉकहोम. इस साल तीन वैज्ञानिकों को केमिस्ट्री (रसायन) का नोबेल पुरस्कार मिलेगा। इनमें अमेरिका की फ्रांसेस एच अरनॉल्ड, जॉर्ज पी स्मिथ और ब्रिटेन के सर ग्रेगरी पी. विंटर शामिल हैं। तीनों वैज्ञानिकों को विकास के लिए उत्तरदायी एंजाइम, पेपटाइड्स और एंटीबॉडीज पर उनकी रिसर्च के लिए पुरस्कार दिया जाएगा।

तीनों वैज्ञानिकों ने जीवन को आगे ले जाने की ताकत को शोध का आधार बनाया। 1993 में अरनॉल्ड ने एंजाइम के विकास का अध्ययन किया। एंजाइम भी प्रोटीन होते हैं जो रासायनिक प्रक्रिया को तेज कर देते हैं। अरनॉल्ड ने कई सालों के शोध के बाद नए उत्प्रेरक (प्रोटीन) बना लिए। उनके द्वारा तैयार एंजाइम का इस्तेमाल दवाइयों और नवीनीकृत ईंधन में किया जा रहा है।

स्मिथ और ग्रेगरी ने प्रोटीन-एंटीबॉडी की खोज की

वहीं जॉर्ज स्मिथ ने बैक्टीरियोफेज (बैक्टीरिया में पलने वाला वाइरस) तैयार किया। इसका इस्तेमाल भी नए प्रोटीन तैयार करने में किया जा सकता है। ग्रेगरी विंटर ने फेज प्रक्रिया का इस्तेमाल कर नए एंटीबॉडी विकसित किए। इस प्रक्रिया से तैयार एडालिमुमैब नाम के एंडीबॉडी को 2002 में मान्यता दी गई। आर्थराइटिस, सोरियासिस जैसी बीमारियों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। फेज प्रक्रिया से तैयार एंटीबॉडीज जहर का प्रभाव खत्म कर देते हैं और मैटास्टेटिक कैंसर के इलाज में उपयोगी हैं।

अरनॉल्ड को मिलेगी आधी पुरस्कार राशि

रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेस की ओ से तीनों को 90 लाख स्वीडिश क्रोनर (7 करोड़ 33 लाख रुपए) का इनाम मिलेगा। अरनॉल्ड को आधी पुरस्कार राशि मिलेगी। बाकी बची पुरस्कार की रकम दो अन्य वैज्ञानिकों में बांट दी जाएगी।

भौतिकी और चिकित्सा के नोबेल का ऐलान

भौतिकी में लेजर पर नई खोज के लिए अमेरिका के आर्थर एश्किन, फ्रांस के गेरार्ड मोरो और कनाडा की डोना स्ट्रिकलैंड के नामों का ऐलान किया जा चुका है। वहीं, कैंसर के इलाज में नई थैरेपी ढूंढने के लिए अमेरिका के जेम्स एलिसन और जापान के तासुकु होंजो को चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार दिया जाएगा।