होशंगाबाद। नवागत कलेक्टर आशीष सक्सेना ने सोमवार को जिले की कमान संभाली और मंगलवार को जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। अस्पताल में निरीक्षण के दौरान कई मरीजों ने कलेक्टर से उपचार में की जा रही लापरवाही की शिकायत भी की कलेक्टर आशीष सक्सेना ने सिविल सजज़्न डॉ सुधीर डेहरिया से मरीजों की समस्या हल करने को कहा। 25 दिसम्बर मंगलवार को सरकारी छुट्टी होने के बाद जिले के नए कलेक्टर का सरकारी अस्पताल में औचक निरीक्षण से जिला अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ सकते में आ गया। कलेक्टर सबसे पहले इमरजेंसी वार्ड पहुचे वहाँ तत्काल उपचार के बारे में मौजूद स्टाफ से जाना उसके बाद ओपीडी रूम पहुचकर पर्ची कैसे बनती है इसके बारे में जाना एक के बाद निरीक्षण से जिला अस्पताल का डॉक्टरों सहित पूरा स्टाफ सकते में आ गया।

संभागीय मुख्यालय स्थित जिला चिकित्सालय की व्यवस्थाओं में आज भी कोई सुधार नहीं हो सका है। अधिकांशत: डॉक्टरों की कमी का रोना रोकर रिफर सेंटर बन चुके सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने मंगलवार दोपहर नवागत कलेक्टर आशीष सक्सेना के सामने जिला अस्पताल में व्याप्त अनियमितताओं की पोल उस वक्त खुल गई जब मरीजों के परिजनों ने सिविल सर्जन डॉ सुधीर डेहरिया के सामने अपनी पीड़ा रोते हुए व्यक्त की। इस दौरान जहां एक मरीज के परिजन ने बताया कि वह विगत एक सप्ताह से ब्लड के लिए भटक रहा है। उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। तो दूसरी तरफ डोलरिया के डूडूगांव निवासी युवक दुर्गेश ने बताया कि उसकी पत्नी नंदनी को डिलेवरी हुई है। करीब 11 दिन से अस्पताल में भर्ती है। स्टॉफ नर्स ने टांके वाली जगह पर टेप को खींचकर अलग कर दिया था और अभद्र व्यवहार किया था। जिससे टांकें खिंचा गए थे और वहां पस निकलने लगा था। मैंने बार-बार ड्यूटी पर मौजूद नर्सों को पत्नी की गंभीर हालत से अवगत कराया परंतु कोई सुनवाई नहीं हुई।

सिविल सर्जन तक को शिकायत की थी। नर्सों ने कहा कि तुम खुद कपड़े घाव को साफ कर लिया करो। तो मैंने स्वयं विवश होकर अपनी पत्नी के घाव को अपने हाथ से सफाई की परंतु फिर भी सुनवाई नहीं हुई। सोमवार को जब अति हो गई तो सिविल सर्जन ने मेरी पत्नी का इलाज कराया। टांके से हुए इंफेक्शन से बच्चेदानी भी सडऩे लगी। खराब स्कीन को काटकर हटाया गया। जिला अस्पताल में नर्सों द्वारा किए गए दुव्र्यवहार और इलाज में गंभीर लापरवाही की शिकायत करते हुए युवक कलेक्टर सक्सेना के सामने रो पड़ा। तब कलेक्टर ने सिविल सर्जन को उचित इलाज के निर्देश दिए।

इस दौरान मीडिया ने कलेक्टर के सामने जिला अस्पताल में व्याप्त गंदगी सहित बर्नवार्ड में पलंग पर लकड़ी बांधकर स्वयं की मच्छरदानी से जले हुए मरीजों की परिजनों द्वारा व्यवस्था करने सहित बर्नवार्ड में एसी की व्यवस्था की बात रखी। जिस पर सिविल सर्जन ने बताया कि बर्नवार्ड को मॉडीफाई किया जा रहा है जल्द ही व्यवस्था में सुधार होगा। वहीं करोड़ों रूपए के ट्रामा सेंटर की जानकारी मांगने पर सिविल सर्जन बगले झांकने लगे और अनुचित जानकारी देने लगे। कलेक्टर को वास्तविकता नहीं बताई कि ट्रामा सेंटर का मेन गेट अलग है और बताया गया कि वहां पर पर्याप्त जगह ट्रामा सेंटर के हिसाब से नहीं है। फिर सवाल उठता है कि ट्रामा सेंटर के नाम पर बिल्डिंग क्यों बनाई और करोड़ों रूपए के स्टूमेंट क्यों खरीदे। वहीं जिला अस्पताल की रसोईघर में भी महिला रसोईयों को अनियमित तरीके से खाना बनाते हुए देखा गया। फिलहाल कलेक्टर ने साफ सफाई पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने जनभागीदारी से जिला अस्पताल में व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने की बात कहीं। नवागत कलेक्टर आशीष सक्सेना ने बताया कि मैं अस्पताल देखने आया था। यहां पर सभी व्यवस्थाएं बहुत अच्छी हैं। अगर कोई व्यक्ति अस्पताल के लिए दान करना चाहे तो जनभागीदारी के माध्यम से कर सकता है। इस तरह से ओर भी अस्पताल निरीक्षण करता रहूंगा।