भोपाल। भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक हंगामें की भेंट चढ़ गई। बैठक में नगर निगम की काम करने से दुखी होकर एमआईसी सदस्य और वार्ड 44 की पार्षद मंजूश्री बारकिया इस्तीफा दे दिया। इसके बाद परिषद की बैठक में हंगामा हो गया। कांग्रेस पार्षद मुर्दाबाद के नारे लगाने लगे। वहीं, महिला पार्षद मंजूश्री को ढांढस बंधाते नजर आईं।

बैठक शुरू होने के साथ ही प्रश्नकाल के दौरान एमआईसी सदस्य मंजूश्री बारिकिया ने उनके वार्ड में छोटे-छोटे काम नहीं होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हमें अपने वार्ड में छोटे से छोटे काम के लिए महापौर और मंत्रियों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। महापौर और मंत्री जिस काम के लिए फोन कर दें वो काम तो हो जाते हैं। लेकिन, अगर हम किसी काम के लिए कहें तो नहीं होते। अधिकारी फोन तक नहीं उठाते। जब महापौर के यहां जाओं तो वही अधिकारी वार्ड की जगह उनके दरबार में खड़े नजर आते हैं। जब सारे काम महापौर और मंत्री के जरिए होने हैं तो हम क्या करें। इतना कहने के बाद मंजूश्री ने इस्तीफा दे दिया। मंजूश्री के इतना कहते ही सदन में हंगामा हो गया। और कांग्रेस पार्षद मुर्दाबाद के नारे लगाने लगे। अपनी बात कहते मंजूश्री का गला रुंध आया औऱ उनकी आंखो से आंसू आने लगे। इस बीच दोनों दलों की महिला पार्षद उनके पास पहुंची और उन्हें गले लगाकर ढांढस बंधाने लगीं।

मंजूश्री ने क्या लिखा त्यागपत्र में

माननीय श्री सुरजीतसिंह जी चौहान

अध्यक्ष, नगर पालिक निगम

भोपाल (मप्र)

विषयः पार्षद वार्ड 44 का पार्षद पद से त्यागपत्र

महोदय,
करीब साढ़े तीन साल पहले जब मैंने पार्षद पद का चुनाव लडा था मैं समाजसेवा के क्षेत्र से आई थी और अपनी इस सेवा के कुछ सपनों को पूरा करने को लेकर मैदान में उतरी थी। लेकिन आज बडे ही दुख के साथ लिखना पड़ रहा है कि यह सब केवल इसलिए नहीं हो पा रहा है क्योंकि पार्षद ही नहीं एमआईसी होने के बावजूद भी हमारे मातहत अधिकारी ही हमें तवज्जो नहीं देते और जब उनकी शिकायत की जाए तो उच्चाधिकारी भी कोई सुनवाई नही करते। अधिकारियों ने तो फोन न उठाने की कसम ही खा रखी है। किसी भी स्तर का अधिकाऱी हो वह उसकी इच्छा होगी तभी फोन सुनेगा। न सिविल वाला सुन रहा है, न वाटर वाला और न ही लाइट वाला कोई सुनवाई कर रहा है।

सबसे बड़ी बात यह कि वार्डों की दुर्दशा हो रही है। गंदगी के ढेर कालोनियों में जगह जगह दिखाई देते हैं लेकिन उन्हें उठाने वाला अमला मैदान में दिखाई ही नहीं देता। जहां 50 कामगार बताए जाते हैं वहां 20 भी नहीं होते हैं। बारिश के दिनों में नालागैंग के अते पते नहीं हैं। पेड़ों की छंटाई या कटाई करने वाले कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है। फोन तो उठाते ही नहीं ऊपर से काम में लेन-देने की बात करते हैं। वार्ड के विकास कार्यों की फाइल गुम हो जाती है। वार्डों में विकास कार्य सही हो रहे हैं या गलत, या कार्य की क्वालिटी कैसी है यह देखने का पार्षदों को अधिकार ही नहीं दिया गया क्योंकि पूर्व में तो पार्षद से कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र चाहा जाता था लेकिन अब शायद इसकी आवश्यकता ही नहीं लग रही है।

उपरोक्त स्थिति को देखते हुए मुझे लगता नहीं कि मैं जनता की सेवा पूरे मन से कर रही हूं और जनता की अपेक्षा पर खरा उतर पा रही हूं। मेरे क्षेत्र के बुजुर्ग, महिला और पुरुष मेरी ओर बड़ी आशा भरी नजरों से देखते हैं और चाहते हैं कि मैं उनके घर के सामने की स्ट्रीट लाईट ठीक करा दूं, उनकी गलियों में सफाई करा दूं, सीवेज की पाइप लाइन ठीक करा दूं, ओपन सीवेज बह रहा है उसे ठीक करा दूं, चेंबर पर ढक्कन लगवा दूं, गणेशजी की झांकी का शेड बनवा दूं, लेकिन ये कोई भी कार्य नहीं हो पा रहे हैं क्योंकि यह अत्यावश्यक सेवा जनता की है, अधिकारियों की नहीं। यह भी हो सकता है कि यह केवल मेरी समस्या हो और मेरे वार्ड में नहीं हो पा रहा हो।

इसी कारण अपने क्षेत्र वार्ड क्रमांक 44 की जनता से माफी मांगते हुए उनकी पूरी सेवा न कर पाने के कारण अपना पार्षद पद से इस्तीफा आपकी ओर सौंप रही हूं। हो सकता है कि मेरी मनहूसियत का साया इस वार्ड से हटने के बाद यहां विकास की गंगा बहने लगे। यदि ऐसा होगा तो मुझे अत्यंत खुशी होगी।

धन्यवाद।

(मंजूश्री नगीन बारकिया)
पार्षद वार्ड 44 एवं एमआईसी

इन मुद्दों बैठक में होनी है इन मुद्दों पर चर्चा

दरअसल आज हो रही बैठक में नगर निगम ने सेवाओं पर मनोरंजन कर लगाने की तैयारी पूरी कर ली है। इसके लगते ही मल्टी प्लेक्स में मूवी देखना, मॉल में गेम जोन का लुत्फ लेना और सैर सपाटा आना-जाना करीब 20 प्रतिशत तक महंगा हो जाएगा। मनोरंजन कर की वसूली की जिम्मेदारी जोनल अधिकारी और वार्ड प्रभारी के माध्यम से वार्ड के अमले से कराई जाएगी। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। स्टेट म्यूजियम और वन विहार आदि पर टैक्स लगेगा या नहीं अभी इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। सेलिब्रिटी म्यूजिकल नाइट्स और लाइव शो में एंट्री के लिए टिकट लगने वाले आयोजनों पर भी निगम मनोरंजन कर वसूल करेगा। ऐसे आयोजन करने से पहले इसकी परमिशन निगम से लेनी होगी और टिकट की बिक्री से होने वाली आय का 20 प्रतिशत निगम को अदा करना होगा। जीएसटी लागू होने के बाद यह स्वतः ही खत्म हो गया था। चूंकि, जीएसटी में मनोरंजन कर का प्रावधान नहीं किया गया है, ऐसे में राज्य सरकार ने उक्त कर को वसूलने की तैयारी फिर से कर ली हैै। इस बार वसूली का जिम्मा शहर सरकार को दिया गया है।