जयपुर। केंद्र सरकार ने बुधवार को एससी/एसटी अधिनियम के मूल प्रावधानों को बहाल करने के लिए संसद में संविधान संशोधन विधेयक लाने का फैसला किया है। सरकार का ये फैसला एनडीए के नेताओं राम विलास पासवान और रामदास आठवले के समेत गठबंधन भागीदारों के दबाव में आकर किया है।

आपको बता दे कि मंगलवार को लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान के बेटे चिराग ने कहा था कि अगर सरकार 7 अगस्त तक सदन में एससी एसटी एक्ट में बदलाव नहीं लाती है तो देश में 9 अगस्त को बहुत बड़ा आन्दोलन होगा। जिसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज बुधवार को अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दे दी है।

अगर ये संशोधन में संसद में पास हो जाता है 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट का फैसला रद्द हो जायेगा। आपको बता दे कि कोर्ट के फैसले से एससी/एसटी अधिनियम के प्रभाव को कम करने के लिए इस कानून के तहत आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। गिरफ्तारी जांच एजेंसी या पुलिस द्वारा प्रारंभिक जांच के बाद करने के आदेश दिए थे।

कोर्ट के इस निर्णय के तुरंत बाद, विभिन्न दलित समूहों ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू किया था। जिसमे देश की कई इलाकों से हिंसा की खबर आई थी। इसके अलावा इस मामले की सुनवाही करने वाले न्यायमूर्ति एके गोयल को सेवानिवृत्त के बाद राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष नियुक्त करने के बाद सरकार की चारो ओर से आलोचना होने लगी थी और राजनीतिक दबाव बढ़ गया।