सिवनी मालवा। 2 दिसंबर शनिवार के दिन मुस्लिम समाज एक प्रमुख त्यौहार ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर जुलूस निकलेगा। ईद मिलादुन्नबी का यह त्यौहार 571 ईसवी को शहर मक्का में पैगम्बर साहब हजरत मुहम्मद सल्ल. का जन्म हुआ था। इसी की याद में ईद मिलादुन्नबी का पर्व मनाया जाता है। हजरत मुहम्मद सल्ल. ने ही इस्लाम धर्म की स्‍थापना की है। ये इस्लाम के आखिरी नबी हैं, ऐसा माना जाता है कि इनके बाद कयामत तक कोई नबी नहीं आने वाला।

यह मुस्लिम धर्मावलंबियों का सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार। इस दिन विशेष रूप से जगह-जगह जुलूस निकलते हैं, गली-गली चरागा होता हैं, खाने-पकाने का भी खूब इतंजाम होता हैं और ये सब एक जश्न की सूरत मे हर साल नबी सल्लल लाहो अलैहे वसल्लम की उम्मत बड़े ही एहतमाम के साथ करती हैं। और इस जश्न को ईद मिलादुन्नबी कहा जाता हैं।

ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर मुस्लिम समाज की ओर से शहर में जुलूस निकाला जाता है। इस जुलूस में हर आयु वर्ग के लोग शामिल होते हैं। ये जुलूस शनिवार दोपहर 02 बजे से जामा मस्जिद सदर मकबूल हसन के नेतृत्व में जामा मस्जिद सिवनी मालवा से निकाला जाएगा जो नगरपालिका गांधी चौक होते हुए लोखरतलाई नाके से काजी मार्ग होकर रेंज ऑफिस चौराहे के पास से मुख्य मार्ग होते हुए गांधी चौक से पुनः जामा मस्जिद पहुंचकर धार्मिक आयोजन के बाद समाप्त होगा।

हजरत मुहम्मद
इन्होंने इस्लाम धर्म का प्रवर्तन किया। ये इस्लाम के सबसे महान नबी और आख़िरी सन्देशवाहक (अरबी: नबी या रसूल, फ़ारसी : पैग़म्बर) माने जाते हैं जिन को अल्लाह ने फरिश्ते जिब्रईल द्वारा क़ुरान का सन्देश’ दिया था। मुसलमान इनके लिये परम आदर भाव रखते हैं। ये इस्लाम के आखिरी ही नहीं बल्कि सबसे सफल संदेशवाहक भी माने जाते है। मुहम्मद वह श्ख़स हैं जिन्होने हमेशा सच बोला और सच का साथ दिया। इनके दुश्मन भी इनको सच्चा कहते थे और ये बात इतिहास में पहली बार मिलती है।