लखनऊ।(हिस) उत्तर प्रदेश चुनाव नतीजे के बाद किस राजनेता का ब्लड प्रेशर बढ़ा और किसका घटा, यह सवाल हर आम और खास की जुबान पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब उत्तर प्रदेश में भाजपा की आंधी चलने की बात कही थी तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा था कि कुछ लोग आंधी की बात कर रहे हैं लेकिन हमें तो उनकी हवा भी नजर नहीं आ रही थी। अब नतीजे आने के बाद मुख्यमंत्री को इस बात का अहसास तो हो ही गया होगा कि इस चुनाव में मोदी की आंधी नहीं, सुनामी चल रही थी। चुनाव के दौरान अखिलेश यादव ने भी यह भी कहा था कि नरेंद्र मोदी उनसे घबरा गए हैं। वे उनका चेहरा देखते हैं लेकिन अपनी पार्टी की हार देखकर उनके चेहरे पर पसीना आता है।
मुंह सूख जाता है। उन्हें पानी-पीकर अपना भाषण देना पड़ता है। तीसरे चरण के मतदान के बाद उन्हें और भाजपा के बड़े नेताओं को अपना ब्लड प्रेशर नपवाना पड़ेगा लेकिन चुनाव के ठीक बाद 9 मार्च को जब छह चैनलों का एक्जिट पोल आया, अखिलेश यादव को ही पसीने छूट गए थे। यही वजह था कि उन्होंने बसपा से हाथ मिलाने का राग आलापना शुरू कर दिया था।

आजम खान जैसे नेता भी बौखला गए थे और उन्होंने 380 सीटें जीतने का दावा कर दिया है और सपा की हार के बाद उन्होंने जिस तरह की प्रतिक्रिया दी है, उससे लगता नहीं कि उनका रक्तचाप सामान्य है। प्रधानमंत्री का ब्लड प्रेशर तो नहीं बढ़ा, लेकिन सपा नेताओं का ब्लड प्रेशर जरूर बढ़ गया है लेकिन उसे नपवाने में भी उन्हें थोड़ी सावधानी बरतनी होगी। किसी मीडियाकर्मी की नजर पड़ गई तो क्या होगा? हार के बाद अखिलेश यादव और एक पत्रकार के बीच हुई गर्मागर्म वार्ता से आखिर क्या संदेश मिलता है।

शीर्ष पर बैठा व्यक्ति सामान्य परिस्थिति में किसी पत्रकार को सवाल पूछने की नसीहत तो नहीं देता। चाहे उस पर उसने कितने भी उपकार क्यों न किए हों।

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